विनायक जी की कहानी – Vinayak ji kahani – Ganesh ji ki Kahani

विनायक जी की कहानी – Vinayak ji kahani – Ganesh ji ki Kahani

Vinayak ji kahani

Vinayak ji kahani– एक सास बहु थी। सास उसकी बहु को खाना नहीं देती थी। बहु रोज नदी पर जाती। जाते समय घर से आटा ले जाती , नदी से पानी लाती , आटा गूंधती। पंसारी की दूकान से थोड़ा गुड़ , घी खरीद लाती और शमशान की चिता पर रोटी सकती। रोटी चूरकर घी , गुड़ डाल चूरमा बनाती। पास ही मंदिर में विनायक जी की पूजा करके भोग लगाती और फिर खुद खा लेती। ऐसा बहुत दिन तक चलता रहा। विनायक जी को ऐसा देख कर बहुत अचम्भा हुआ और उन्होंने अपने मुँह में ऊँगली रख ली।

बहु तो घर आ गयी। दूसरे दिन मंदिर के पट खुले तो लोगो ने देखा विनायक जी के मुँह में ऊँगली है और आश्चर्य करने लगे। सब लोग मंदिर में जमा हो गए व कहने लगे की जो कोई विनायक जी के मुँह से ऊँगली निकलवायेगा उसे इनाम दिया जायेगा। सभी ने अपनी अपनी कोशिश की पर कोई फायदा नहीं हुआ। बहु ने अपनी सासु से कहा मैं कोशिश करती हूँ। सासु बोली इतने बड़े बड़े कुछ नहीं कर सके तो तुम क्या कर लोगी। लेकिन बहु ने कहा मैं विनायक जी के मुँह से ऊँगली निकलवा दूंगी। गाँव वाले मंदिर के आँगन में एकत्रित थे। बहु आई , निज मंदिर में जाकर कपाट बंद कर दिए और विनायक जी से बोली मैं मेरे घर से आटा लाती , नदी से पानी लाती , पंसारी से गुड़ घी लाती चिता पर रोटी सकती। इसमें आपको क्या आपत्ति हुई ? आपको मुँह से ऊँगली हटानी पड़ेगी। विनायकजी ने सोचा – इसने पहले मुझे भोग लगाया , सच्चे मन से मुझे ध्याया है। इसकी बात तो माननी पड़ेगी और फिर ऊँगली हटा ली। बहु ने मंदिर के दरवाजे खोले।

लोगो ने देखा विनायक जी ने ऊँगली हटा ली है। गाँव वाले कहने लगे , बहु तू क्या जादू टोना करके आई जिससे विनायक जी ने ऊँगली हटा दी है। बहु ने कहा – मेरी सासु मुझे भोजन नहीं देती थी तब मैं घर से आटा नदी से पानी व पंसारी से घी गुड़ लेकर चिता पर उसे सेकती , पहले विनायक जी के भोग लगाती फिर खुद खाती इसलिए विनायक जी को अचम्बभा हुआ और उन्होंने ऊँगली रखी। और अब ऊँगली हटा दी है। जैसे विनायक जी ने बहु से प्रसन्न होकर उसका मान बढ़ाया वैसे सभी पर कृपा रखे। जय विनायक जी महाराज।

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